गोपेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ, 
कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
शिवगंज। बड़गांव स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर, देवली रोड में रविवार को श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा का वाचन अयोध्या से पधारे श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री अयोध्या दास जी महाराज के मुखारविंद से किया जा रहा है।
कथा शुभारंभ से पूर्व सुबह ठीक 9 बजे हनुमान चौक बड़गांव से गोपेश्वर धाम तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में चावंड, उदयपुर से पधारे श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री हितेश्वरानंद जी सरस्वती महाराज एवं श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री अयोध्या दास जी महाराज का पावन सानिध्य रहा। कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु, सनातन धर्म महिला समिति शिवगंज-सुमेरपुर की सदस्याएं तथा गोपेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हुए।
करीब दोपहर 12 बजे कलश यात्रा गोपेश्वर धाम पहुंची। यहां संतों का स्वागत किया गया तथा सभी श्रद्धालुओं को खीर की प्रसादी वितरित की गई। कथा के मुख्य लाभार्थी श्रीमती नीलम कंवर धर्मपत्नी श्री महेंद्र सिंह राठौड़, निवासी अणगौर, हाल बैंगलोर हैं।
भागवत कथा में बताया श्रीमद् भागवत का महात्म्य
दोपहर 2 बजे श्रीमद् भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा व्यास श्री अयोध्या दास जी महाराज ने प्रथम दिवस श्रीमद् भागवत के महात्म्य का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि नैमिषारण्य में सुखदेव मुनि द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराया जा रहा था, जहां 88 हजार ऋषि-मुनि विराजमान थे। शौनक जी सहित ऋषिगण ने जनकल्याण से जुड़े प्रश्न किए, जिनका उत्तर सुखदेव मुनि ने प्रसन्न भाव से दिया।
कथा व्यास ने गुरु और शिष्य की पात्रता, दान-पुण्य की महत्ता तथा माया के जाल में फंसे जीव को उससे मुक्त होने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत जीव को मुक्ति प्रदान करने वाला भगवान का ही स्वरूप है।
उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि देवता अमृत कलश लेकर सुखदेव मुनि के पास पहुंचे और परीक्षित को अमृत पिलाने के बदले स्वयं भागवत कथा सुनने की बात कही। इस पर सुखदेव मुनि ने कहा कि यह तो व्यापार जैसी सौदेबाजी है, जो उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत की महिमा सभी ग्रंथों में सर्वोपरि है। कथा में ब्रह्माजी द्वारा किए गए दृष्टांत का वर्णन करते हुए बताया गया कि जब एक पलड़े में समस्त ग्रंथ और दूसरे पलड़े में श्रीमद् भागवत को रखा गया तो भागवत जी का पलड़ा भारी रहा।
नारद जी और भक्ति-ज्ञान-वैराग्य का प्रसंग
कथा के दौरान नारद जी एवं भक्ति के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। बताया गया कि नारद जी अनेक तीर्थों और स्थानों पर भ्रमण करने के बावजूद जब संतोष प्राप्त नहीं कर सके, तब उन्होंने धरती पर सत्य, तप, दान, दया और करुणा के अभाव को देखा।
वृंदावन पहुंचने पर उन्होंने एक युवती को देखा, जिसके साथ उसके दो वृद्ध पुत्र अचेत अवस्था में पड़े थे। युवती ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि वह कर्नाटक से महाराष्ट्र होते हुए गुजरात पहुंची, जहां उसका क्षय हो गया, लेकिन वृंदावन पहुंचने पर वह पुनः युवा हो गई। उसके दोनों पुत्र ज्ञान और वैराग्य वृद्ध ही रहे।
नारद जी ने वेद-पुराण आदि का श्रवण कराया, लेकिन कोई परिवर्तन नहीं हुआ। इसके बाद भगवान के निर्देशानुसार उन्हें श्रीमद् भागवत कथा सुनाई गई। भागवत श्रवण के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य युवा हो गए तथा भक्ति भी पूर्ण रूप से जागृत हो गई।
कथा व्यास ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में कितने भी गलत कर्म कर चुका हो, लेकिन श्रद्धा और भाव से श्रीमद् भागवत का श्रवण करता है तो उसके जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन संभव है।
धुंधकारी की मुक्ति का प्रसंग
कथा में आत्मदेव ब्राह्मण के प्रसंग के माध्यम से गोकर्ण जी द्वारा धुंधकारी को श्रीमद् भागवत कथा सुनाए जाने का वर्णन किया गया। कथा श्रवण के प्रभाव से धुंधकारी जैसी प्रेत योनि में पड़ी आत्मा को भी मुक्ति प्राप्त हुई।
इस प्रकार प्रथम दिवस श्रीमद् भागवत के महात्म्य, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं कथा श्रवण की महिमा के विभिन्न प्रसंगों के साथ कथा का समापन हुआ।
महामंडलेश्वर हितेश्वरानंद जी ने दिए आशीर्वचन
कथा के दौरान चावंड, उदयपुर से पधारे श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री हितेश्वरानंद जी सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिए। उन्होंने गोपेश्वर महादेव की महिमा बताते हुए कहा कि श्रद्धालु स्वयं को गोपी भाव में रखकर कथा का श्रवण करें और भक्ति भाव से नृत्य करें तो भगवान की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कथा व्यास श्री अयोध्या दास जी महाराज की महिमा बताते हुए कहा कि श्रद्धालु सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें ब्रह्मचारी संन्यासी संत के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि महाराज जी आगामी दो माह तक क्षेत्र में रहेंगे, ऐसे में श्रद्धालु सत्संग के माध्यम से उनसे भक्ति एवं आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
कथा आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।








